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लंड को मुंह में ले लो

Lund ko muh me le lo:

Antarvasna, kamukta मैं मुंबई का रहने वाला हूं मेरी पैदाइश पुणे में हुई लेकिन उसके कुछ वर्षों बाद मेरा परिवार मुंबई में आकर सेटल हो गया मेरे पिताजी का नेचर बहुत ही शांत स्वभाव का है वह ज्यादातर किसी से भी बात नहीं करते उन्हें जब घर में कोई जरूरी काम होता तो ही वह बात किया करते थे। मैं जिस कॉलेज में पढ़ता था वहां पर मुझे सिगरेट पीने की बड़ी गंदी आदत लग गई और मैं सिगरेट पीने का आदी हो गया मैंने कई बार सिगरेट छोड़ने की कोशिश भी की लेकिन मुझसे हो ही नहीं पाया। मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब करता हूं और वहां पर मैं मैनेजर हूं एक दिन मैं अपने ऑफिस के बाहर लंच टाइम में आया और वहां पर मैंने पनवाड़ी से कहा कि मुझे एक सिगरेट देना। मैं वहां सिगरेट पी रहा था तभी एक लड़की बड़ी ही तेजी से आई उसने पनवाड़ी से कहा भैया सिगरेट देना मैं उसकी तरफ देखने लगा वह अकेले ही थी और वह सिगरेट पीने लगी उसके बाद वह उसी तेजी से वापस चली गई।

वह पनवाड़ी कहने लगा भैया आजकल का समय बहुत खराब है लड़कियां भी सिगरेट पीने लगी है मैंने उसे समझाया और कहा इसमें समय खराब वाली कोई बात नहीं है अब समय बदल रहा है अब लड़कियां भी सिगरेट पी सकते हैं ऐसा कुछ भी नहीं है। वह पनवाड़ी तो ना जाने उस लड़की को क्या-क्या कह रहा था मैं भी वहां से अपने ऑफिस में चला गया अगले दिन जब मैं वहीं पर सिगरेट पी रहा था तो दोबारा से वह लड़की मुझे दिखाई दी उसके चेहरे पर मैं जब भी देखता तो उसके अंदर एक अलग ही कॉन्फिडेंस नजर आता वह हमेशा अकेले ही आया करती थी मैंने उसके साथ उसका कोई भी दोस्त नहीं देखा। एक दिन मैं सिगरेट पी रहा था तो उस दिन मैंने उससे बात की मैंने उससे हाथ मिलाते हुए कहा मेरा नाम रमन है उसने मुझे कहा मेरा नाम गीतिका है मैंने गीतिका से कहा मैं तुम्हें हर रोज यहां देखा करता हूं तो सोचा आज तुमसे बात कर ही लूं। गीतिका कहने लगी हां मैंने भी तुम्हें यहां पर देखा है गीतिका मुझसे पूछने लगी तुम कौन सी कंपनी में जॉब करते हो मैंने उसे अपनी कंपनी का नाम बताया तो वह मुझे कहने लगी वहां पर तो मेरे भैया भी जॉब करते हैं।

जब उसने अपने भैया का नाम बताया तो मैंने कहा हां वह हमारे साथ ही जॉब करते हैं मैंने गीतिका के बारे में पूछा तो उसने मुझे सब कुछ बता दिया और उसके बाद तो हम दोनों की बातचीत होने लगी। गीतिका का नेचर बहुत ही अच्छा है और वह बड़े खुले विचारों की है हम दोनों सिर्फ उसी पनवाड़ी के पास मिला करते थे और हम दोनों को एक साथ मिलते हुए करीब तीन महीने हो चुके थे। हम लोग जब भी वहां पर मिलते तो एक दूसरे से जरूर बात किया करते थे यह सिलसिला अब चलता ही जा रहा था। एक दिन मैंने गीतिका से कहा यदि तुम्हें बुरा ना लगे तो क्या तुम मेरे साथ मूवी देखने के लिए चल सकती हो वह मुझे कहने लगी मुझे मूवी देखने का बिल्कुल भी शौक नहीं है लेकिन फिर भी तुम मुझे कह रहे हो तो मुझे तुम्हारे साथ आना ही पड़ेगा। मैंने उसे कहा दरअसल मैंने दो टिकट बुक की थी लेकिन मेरा जो दोस्त है वह किसी वजह से नहीं आ पा रहा है तो मैं सोच रहा था कि यदि कोई मेरे साथ चलता तो मुझे अच्छा लगता इसीलिए मैंने तुमसे पूछा। गीतिका मुझे कहने लगी हां क्यों नहीं मैं तुम्हारे साथ चलूंगी गीतिका मेरे साथ अब मूवी देखने के लिए तैयार हो चुकी थी मैं बहुत खुश था क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि गीतिका मेरे साथ मूवी देखने के लिए आएगी। वह मेरे साथ मूवी देखने के लिए तैयार हो चुकी थी और अगले ही दिन हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए। हम दोनों जब मूवी देखने के लिए गए तो गीतिका उस दिन बहुत सुंदर लग रही थी मैं सिर्फ उसके चेहरे की तरफ देख रहा था मैं उसे बड़े ध्यान से देखता गीतिका मुझे कहने लगी कि तुम मुझे ऐसे क्या देख रहे हो। मैंने उसे कहा तुम बहुत सुंदर लग रही हो इसलिए मैं तुम्हें ऐसे देख रहा हूं गीतिका कहने लगी क्यों मैं सुंदर नहीं हूं मैंने उसे कहा तुम बहुत ज्यादा सुंदर हो लेकिन मैंने आज ही तुम्हें ध्यान से देखा गीतिका कहने लगी रमन तुम्हारी भी बात कुछ अलग ही है।

हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए और हम दोनों ने साथ में मूवी देखी तो मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि मैं बहुत ज्यादा खुश था मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं गीतिका के साथ मूवी देखूंगा। उस दिन शायद गीतिका को भी मेरे साथ मूवी देखना अच्छा लगा हम दोनों मूवी देख कर बाहर आये तो गीतिका कहने लगी तुम्हारा आज का क्या प्रोग्राम है। मैंने उसे कहा मेरा तो आज का ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं है मैं बस मूवी देखने के लिए आया था उसके बाद मैंने सोचा कि हम लोग घर निकल जाते हैं लेकिन गीतिका कहने लगी अब आज का दिन हम दोनों साथ में ही बिताते हैं। गीतिका ने मुझे कहा मैं तुम्हें लंच के लिए ले चलती हूं तुमने मुझे मूवी दिखाई है मैंने उसे कहा नहीं गीतिका रहने दो लेकिन वह मानी ही नहीं उसने मुझे कहा मैं तुम्हें एक रेस्टोरेंट के बारे में बताती हूं हम लोग वहां चलते हैं। हम दोनों कार में बैठ गए और वहां से रेस्टोरेंट में चले गए हम दोनों वहां से रेस्टोरेंट में पहुंचे ही थे तभी गीतिका के कोई जानने वाले मिल गए। गीतिका उनसे बात करने लगी मैं जाकर सीट में बैठ गया मैं गीतिका का वेट करने लगा गीतिका करीब 10 मिनट बाद आई। मैंने उससे पूछा अरे तुम किस से इतनी देर तक बात कर रही थी वह कहने लगी अरे वह मेरे जानकार हैं वह तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे तो मैंने उन्हें बताया कि वह मेरा दोस्त है। हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे मैंने गीतिका से कहा क्या ऑर्डर करना है गीतिका कहने लगी मैं तो यहां अक्सर आती रहती हूं लेकिन आज तुम ऑर्डर करो।

गीतिका ने मेनू मेंरे हाथ में दे दिया और जब मैंने मेनू देखा तो मैंने आर्डर करवा दिया। गीतिका मुझसे कहने लगी मूवी अच्छी थी वैसे मैं मूवी देखना बिल्कुल पसंद नहीं करती लेकिन आज मुझे अच्छा लगा मैंने गीतिका से कहा तभी तो मैं तुम्हें कह रहा था कि तुम मूवी देखने के लिए चलो लेकिन तुम मान ही नहीं रही थी। गीतिका कहने लगी चलो कोई बात नही अब तो मैं तुम्हारे साथ मूवी देखने के लिए भी आ गई, हम दोनों बात कर ही रहे थे कि हम लोगों ने जो आर्डर किया था वह आ गया हम दोनों खाते खाते एक दूसरे से बात करने लगे उसके बाद हम लोग वहां से भी बाहर चले आए। मैंने गितिका से कहा अब क्या प्रोग्राम है तो गीतिका कहने लगी हम लोग कहीं कुछ देर बैठते हैं हम लोग वहां से पार्क में चले आए और कुछ देर पार्क में ही बैठे रहे मुझे मालूम नहीं था कि गीतिका मुझसे इतने देर तक बात करती रहेगी। मेरा भी गीतिका को छोड़कर जाने का मन बिल्कुल नहीं था और गीतिका का भी शायद उस दिन घर जाने का मन नहीं हो रहा था हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे मुझे उस दिन गीतिका के बारे में बहुत सारी चीजों के बारे में मालूम चला। मुझे पता चला कि गीतिका भी पहले पुणे में ही रहती थी और उसका परिवार बाद में मुंबई में सेटल हुआ मैंने गीतिका से कहा कि हम दोनों की ज़िंदगी लगभग एक जैसी ही है। हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे तभी मैंने गीतिका की जांघ पर हाथ रख दिया, वह भी मेरी छाती को सहलाने लगी। मैं समझ गया कि गीतिका के दिल में भी कुछ चल रहा है हम दोनों साथ में समय बिताना चाहते थे इसीलिए मैं गीतिका को लेकर एक होटल में चला गया। गीतिका को भी कोई आपत्ति नहीं थी वह बड़ी ही खुले विचारों की थी उसे इन सब चीजों से कोई परहेज नहीं थी।

मैं जैसे ही गीतिका को होटल में ले गया तो हम दोनों से बिल्कुल भी नहीं रहा गया, मैंने गीतिका के होठों को चूमना शुरू किया मैं उसके होठों का रसपान काफी देर तक करता रहा। मैने गीतिका के स्तनों को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू किया उसे भी मजा आने लगा और वह मेरे लंड को अपने हाथ से दबाने लगी। उसने मेरे लंड को बाहर निकाला और उसे हिलाना शुरू किया उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना है। मैंने उसे कहा क्यों नहीं उसने जैसे ही अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को समाया तो मुझे मजा आ रहा था और वह बड़े अच्छे से अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले रही थी।। उसने काफी देर तक मेरे लंड को सकिंग किया और मेरे अंदर की उत्तेजना भी जाग गई थी। मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया मैंने उसकी गांड को अपने हाथ से दबाया तो मुझे बड़ा मजा आता उसकी योनि से गिला पदार्थ बाहर की तरफ को आने लगा था। उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था और उसकी योनि को चाटने में मुझे जो मजा आया वह मेरे लिए एक अलग ही फीलिंग थी।

उसके मुंह से सिसकिया निकल जाती वह पूरे जोश में आ चुकी थी मैने उसकी योनि पर अपने लंड को सटाया तो उसकी योनि से गिला पदार्थ बहार की तरफ को निकल रहा था। मैंने धक्का देते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया मेरा लंड जैसे ही उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह पूरे जोश में आ चुकी थी उसने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया। मैं उसे लगातार तेजी से धक्के देता रहता उसके मुंह से हल्की सी आवाज निकलती जिसमें की अलग-अलग प्रकार की आवाज से निकाल रही थी। मेरे अंदर और भी ज्यादा जोश बढ़ता जा रहा था मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए परंतु मैं उसकी योनि से निकलती हुई गर्मी को ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाया। मैंने अपने वीर्य को उसके स्तनों पर गिरा दिया मेरा वीर्य जब उसके स्तनों पर गिरा तो उसे बड़ा मजा आया उसने अपने स्तनों से मेरे वीर्य साफ किया। उस दिन हम दोनों ने साथ में रहने का फैसला किया और सारी रात हम दोनों सेक्स करते रहे।


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