चाची की चुदाई भाग – ३

इतना समझा कर मीना चाची चली गयीं। अगले दिन सुबह ही सोनिया को आना था। मैं ड्राइवर के साथ कार में उसे कॉलेज से दस बजे जाकर ले आया। अबकी बार सोनिया को देखने का मेरा नज़रिया ही कुछ और था। मैं रास्ते भर उसे अपनी आँखों से नंगा करता रहा, और सोनिया मुझे अपनी ट्रिप के बारे में बताती जा रही थी। उसे क्या मालूम था कि उसकी माँ और मेरे बीच में क्या संबंध बन चूके थे जिस के कारण मुझे उसके बदन की कुँवारी नशीली शराब पीने को मिलने वाली थी।

घर आ कर सोनिया बोली, “सुनील मैं तो नहा धो कर एक कोक पीयूँगी और सोऊँगी। मैं इतने नहा कर आती हूँ, तुम मेरे लिये एक गिलास में कोक और बर्फ निकाल दो!”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं दीदी आराम से नहा लो!”

मेरे दिमाग में तो सिर्फ़ सोनिया को चोदने का नज़ारा घूम रहा था। एका एक मुझे एक आइडिया सुझा जो मैंने एक किताब में पढ़ा था। सोचा क्यों ना ट्राई मार के देखूँ। यही सोच के मैं चुप-चाप मीना चाची के कमरे में गया और नींद की चार-पाँच टेबलेट ला कर सोनिया की कोक में मिला दी। मुझे मीना चाची ने कल ही बताया था कि जब कईं बार वोह रात को चुदाई के लिये बहुत परेशान हो जाती थीं और सो नहीं पाती थीं तो वोह नींद की गोली लेकर सो जाती थीं। इतने में सोनिया भी नहा-धो कर बाहर आ गयी थी। मुझे आज तक पता नहीं चल पाया है कि लड़कियाँ और औरतें, बहन की लौड़ियाँ इतने सैक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं कि जिससे मर्द बे-काबू हो जाये। क्या हर औरत मन ही मन यह चाहती है कि कोई उसे चोदे? सोनिया ने भी ऐसी नाइटी पहनी हुई थी जो फ़्रंट ओपेन थी और जिस से सिर्फ उसके चूत्तड़ और आधी जाँघें छिप रही थी और स्लीवलेस होने के कारण उसकी साफ चिकनी बगलें दिख रही थीं।

नाइटी का कपड़ा इतना मोटा नहीं था, जिसके कारण उसकी छाती पर उठ रही नोकों से मालूम पड़ रहा था कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी, और जब वोह चौंकड़ी मार कर मेरे सामने पलंग पर बैठी तो मेरा तो बुरा हाल हो गया। उसकी चिकनी जाँघें और पैंटी में कसे हुए उसके चूत्तड़ और चूत की मछलियों को देख कर मेरा लंड तन गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने ऊपर चद्दर डाल कर खुद को शरमिन्दा होने से बचाया। कोक पीते समय सोनिया ने बताया कि अबकी बार उसे ट्रिप में बहुत मज़ा आया और उसने अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करी। थोड़ी देर में वोह बोली, “सुनील मुझे बहुत जोर से नींद आ रही है, मैं तो अपने कमरे में सोने जा रही हूँ!”

मैंने करीब आधा घंटा वेट करा और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपने लंड को मीना चाची के हाई हील के सैंडल से सहलाता रहा। उसके बाद मैं उठा और सोनिया के कमरे कि तरफ गया। सोनिया ए.सी. चला के आराम से दरवाज़ा बंद करके सो रही थी। मैंने चुप-चाप दरवाज़ा खोला और कमरे में घुस गया। सोनिया बड़े आराम से बिस्तर पे पीठ के बल सो रही थी और उसकी नाइटी जो पहले से ही छोटी थी, और उठ कर उसकी नाभी तक चढ़ गयी थी, जिससे कमर के नीचे का सब कुछ दिख रहा था। उसकी पैंटी में छुपी हुई चूत के उभार साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। मेरा तो मादरचोद लंड साला हरामी ये देख कर ही खड़ा हो गया।

मैंने सोनिया के पास जा कर उसके कँधे पकड़ कर थोड़ा जोर से हिलाया और बोला, “दीदी देखो आपकी सहेली का फोन आया है!”

सोनिया को कुछ फरक नहीं पड़ा। वोह तो बस बे-खबर हो कर सोती रही। मैंने फिर भी अपने को पक्का करने के लिये फिर से उसे जोर से आवाज़ दी और हिलाया पर उसको नींद की गोली के कारण कोई असर नहीं हुआ। मैंने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो कर सोनिया की नाइटी के आगे के बटन खोलने लगा और एक-एक करके सारे बटन खोल दिये। दोस्तों, उस समय मेरे हाथ काँप रहे थे क्योंकि आज मैं इतनी हिम्मत करके सोनिया का गोरा दूधिया बदन देखने जा रहा था जिसकी पैंटी और ब्रा सूंघ-सूंघ कर खूब मुठ मारा करता था। सोनिया एक दम दूध की तरह गोरी थी और आज से पहले मैं बहुत तड़पा था उसका नंगा बदन देखने के लिये।

नाइटी के सारे बटन खुलते ही उसके मस्त खिलौने नंगे हो गये और मैंने देखा कि सोनिया के निप्पल भूरे नहीं बल्कि पिंक से थे। सोनिया अब सिर्फ मेरे समने एक पैंटी में लेट कर बे-खबर सो रही थी। मैंने झुक के अपने होंठ खोल के सोनिया के गुलाबी निप्पल अपने होंठों में दबा लिये और उसकी जवान, अभी तक अनछूई मस्त बत्तीस साईज़ की चूँची अपने हाथ में भर ली। मीना चाची की बड़ी-बड़ी गदरायी हुई चूचियों को दबाने के बाद जब मैंने सोनिया की चूचियाँ दबाईं, तब मालूम पड़ा कि साली लौंडिया कि चूँची क्या चीज़ होती है। ऐसा लग रहा था जैसे किसी सख्त अनार को पकड़ लिया हो। दूसरा हाथ मैंने सोनिया की पैंटी में डाल दिया और उसकी बूर को अपने हाथों से फील करने लगा। सोनिया की चूत पर मेरा हाथ टच होते ही मैं तो ऐसा गनगनाया कि मैंने सोनिया के मस्त कच्चे अनार छोड़ कर दोनों हाथों से उसकी पैंटी उतारने लगा।

माँ कसम दोस्तों! क्या साली कुँवारी चूत थी मेरी आँखों के सामने। झूठ नहीं बोलूँगा, इच्छा तो यह करी कि उसकी टाँगें खोल के अपना लौड़ा सरका दूँ उसकी कसी चूत में, पर मीना चाची की इन्सट्रक्शन याद आ गयी। सोनिया की चूत कुँवारी होने के कारण उसकी बूर के लिप्स अभी तक खुले नहीं थे, बल्कि बड़े कायदे से एक लाईन में थे और उसके उसने भी मीना चाची की तरह अपनी चूत से झाँटें साफ कर रखी थीं। मेरा तो लौड़ा बुरी तरह से अकड़ गया था। मैं भी बिना समय गँवाये मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था और मैं पूरा नंगा सोनिया के ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड एकदम सोनिया की चिकनी मखमली चूत पर लग गया था। मैंने मारे मस्ती के सोनिया के पूरे नंगे बदन को अपनी बाहों में कस कर भर लिया और उसके नरम रस भरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उन्हें चूसने लगा। सोनिया की चूचियाँ इतनी सख्त थीं कि मेरी छाती में उसके निप्पल चुभ रहे थे और वो कसे हुए अनार जो मेरे सीने से लग कर थोड़े से दब गये थे, बहुत ही प्यारा सुख दे रहे थे। मेरा बदन तो मारे मस्ती के काँप रहा था, और मैंने अपने आप को थोड़ा सम्भालने के लिये एक सिगरेट जलाई और उसके ऊपर अपना लंड घिसने लगा।

शुरू में तो मेरी यह हालत थी कि बस अभी रस निकला, पर बड़ा कँट्रोल करने के बाद मैं अब बड़े आराम से उसकी चिकनी मखमली चूत पर अपना लंड घिस रहा था। दोस्तों! इतना मज़ा आ रहा था कि कलपना करना भी मुशकिल है। सिगरेट खतम होने के बाद मैंने अपने मुँह में उसकी चूँची भर ली और जोर-जोर से चूसना चालू कर दिया। चूचियों का टेस्ट इतना नशीला था कि इतनी देर से रोका हुआ मेरे लंड का लावा पूरा सोनिया के पेट पर निकल गया और मैं भी परवाह किये बिना सोनिया कि तन्नाई हुई चूचियाँ चुसने में लगा रहा। दोस्तों! मैंने किताबों में सिर्फ पढ़ा था कि जवान चूँची चूसने से लंड तन्ना जाता है पर मैंने तो उस समय खुद अनुभव किया कि मादरचोद मुश्किल से तीन या चार मिनट में फिर से गन्ना बन गया। मैंने उठ कर कपड़े से सोनिया का पेट साफ करा और एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर सोनिया के होंठों पर घिसने लगा। क्या सनसनाहट हो रही थी कि मेरा लंड और कस गया।

करीब पाँच-दस मिनट बाद मैंने सोनिया कि टाँगें खोलीं और उसकी जाँघों को चूसता हुआ अपनी जीभ उसकी कुँवारी बूर पर ले गया। मैंने भी अपनी जीभ की धार सोनिया के बूर की दरार पर खूब घीसी। बाद में जब मस्ती बढ़ गयी तब मैंने अपने होंठ पूरे चौड़े किये और सोनिया की मस्तानी चूत अपने मुँह में भर ली और चूसाई चालू कर दी। क्या मादक सुगँध आ रही थी। मैं तो जन्नत में था। करीब आधा घंटा बूर का मज़ा अपनी ज़ुबां से लूटने के बाद मैं उसकी खुली टाँगों के बीच बैठ गया और अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से अपना सुपाड़ा सोनिया की चूत के लिप्स खोल कर घिसने लगा। थोड़ी ही देर में लौड़ा इतना उबाल खा गया कि इससे पहले मैं रोक पाता सोनिया के खुले लिप्स के उपर ही मेरा लंड झड़ गया। मैंने करीब दो घँटे सोनिया के शरीर के साथ जी भर के खेला, और बाद में फिर से उसे पैंटी पहना कर और नाइटी ढँग से बंद कर के मैं बाहर आ गया और टी.वी. देखने लग गया।

सोनिया करीब शाम को पाँच बजे उठी और उन ही कपड़ों में मेरे पास आ कर बैठ गयी और बोली “सुनील शरीर बहुत दुख रहा है!”

मैने कहा, “कोई नहीं दीदी थोड़ा सा सुस्ता लो अभी आप ट्रिप से आयी हो इसके लिये थकान ज्यादा हो गयी है!”

सोनिया वहीं पर मेरी जाँघों का सहारा ले कर लेट गयी और सुस्ताने लगी। थोड़ी देर बाद वो उठी और फ़्रैश होने के लिये चली गयी। शाम के साढ़े सात बज चुके थे। मैं मीना चाची के कमरे से व्हिस्की की बोत्तल ले आया और अपने लिये एक पैग बनाया और टी. वी. देखने लगा। इतने में सोनिया बाहर आयी और मुझे व्हिस्की पीते देख बोली, “सुनील तुम कब से पीने लग गये, मैं पापा-मम्मी से तुम्हारी शिकायत कर दूँगी।”

मैंने कहा, “सोनिया दीदी आपकी मम्मी को मालूम है। मैं कभी-कभी उनके साथ छुप कर पी लेता हूँ।” मैंने सोनिया को नहीं बताया कि उसकी मम्मी ने ही मुझे हफ़ते भर पहले पीना सिखाया है। और मेरी प्यारी दीदी आप क्या मेरी शिकायत करोगी!

“सच में? रियली…?” तब सोनिया बड़े ही शरारती मूड में मुझसे बोली, “एक शर्त है! तुम्हें मुझे भी टेस्ट करानी पड़ेगी।”

मुझे तो जैसे मन माँगी मुराद मिल गयी। मैंने कहा “चलो आप बैठो। मैं आपके लिये एक पैग बना कर लाता हूँ।”

मैंने अंदर जा कर तीन पैग के बराबर एक पैग बनाया और बाहर आ कर सोनिया को दे दिया। सोनिया एक दम मेरे बगल में बैठी और पहला घूँट उसने ऐसे पीया जैसे कोई कोका कोला हो। पूरा आधा ग्लास एक झटके में पी गयी। फिर बोली, “क्या सुनील यह तो बहुत स्ट्राँग है!”

मैंने कहा, “कोई नहीं, आराम से एक-एक घूँट भर के पियो… तब आपको मज़ा आयेगा!”

टी.वी. पर रोमाँटिक फिल्म चल रही थी। मैं मीना चाची के रूम से जा कर सिगरेट ले कर आ गया। सोनिया पर अब खुमारी चढ़नी चालू हो गयी थी। मैंने जब अपने लिये एक सिगरेट जलाई तो वो बोली, “सुनील ये तुम्हें को क्या हो गया है, पहले शराब, फिर सिगरेट!”

मैंने कहा, “सोनिया दीदी शराब का मज़ा दुगना हो जाता है स्मोक करने से!”

उसने मेरे हाथों से सिगरेट छीन कर एक जोरदार कश लगाया। पहली बार पीने के कारण उसको खाँसी लग गयी। मैं एकदम घबरा उठा और उसकी पीठ सहलाने लगा और पेट के ऊपर हाथ ले जा कर उसे पीछे आराम से सोफे पर बैठाने की कोशिश करने लगा। नाइटी का कपड़ा चिकना होने के कारण मेरे हाथ फिसल गये और उसकी पूरी लैफ्ट साइड की चूँची मेरे हाथ में आ गयी। सोनिया ने उसका कुछ बूरा नहीं माना और मैं भी उसकी चूँची दबाये हुए सोफे पर पीछे खींच लाया और बोला, “सोनिया दीदी! ऐसे थोड़ी पी जाती है! देखो मैं बताता हूँ कि कश लिया जाता है!”

सोनिया शायद खाँसी से थोड़ा घबरा गयी थी। इस कारण वो मेरी बाहों का सहारा ले कर मेरे आगोश में बैठ गयी। पहले तो मैंने उसे उसका पैग दिया और बोला, “लो एक घूँट लगा लो, थोड़ा सा आराम मिलेगा और फिर एक कश लगाओ।”

दो-तीन बार कश लगाने के बाद सोनिया को मज़ा आने लगा और बोली, “सुनील मुझे एक पैग और दो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है!”

मैंने फिर से पहले जैसा पैग बना कर सोनिया को दे दिया। अब वो पैग और सिगरेट तो ऐसे पी रही थी जैसे कब से उसकी आदत हो और अब वो थोड़ा मस्ती में भी आ गयी थी। अचानक उसने मुझसे पूछा, “सुनील! ये लंड क्या कॉक… आय मीन… पेनिस किसको कहते है?”

मैं तो सोनिया के मुँह से लंड सुन कर हक्का बक्का रह गया। मैंने कहा, “आप ये मुझसे क्यों पूछ रही हो?”

सोनिया बोली, “इसलिये पूछ रही हूँ कि मुझे हिंदी के वर्ड नहीं पता बस कॉक दिक पेनिस वगैरह ही पता है! मैंने पहले कभी इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मेरी सहेली संजीदा ने मुझे बताया है कि अपनी पुस्सी में कॉक लेने में बड़ा मज़ा आता है। वो अपनी पुस्सी में अपने नौकर का कॉक खूब लेती है। उसका नौकर इसे लंड बोलता है! बताओ ना सुनील ये पेनिस को ही लंड कहते हैं ना? तुम्हारे पास भी तो होगा, मैं देखना चाहती हूँ!”

मुझे सोनिया के इस बात पर हँसी आ गयी। सोनिया काफी पढ़ाकू लडकी थी और हमेशा फर्स्ट आती थी। मैंने कहा, “आप सहेलियाँ आपस में ऐसे बातें करती हो…?”

तो वो एकदम बोली, “सुनील तुम भी एक दम अनाड़ी हो। मैंने बताया तो था सुबह कि अब की बार ट्रिप पर बहुत मज़ा आया। अबकी पहली बार हम सब ने इस तरह की बातें करी और पता है सुनील? हम चारों को एक रूम मिला था और संजीदा इतनी बदमाश है… उसी ने हम सबको यह सिखाया है। वो ही रात को हमारे सारे कपड़े उतार देती और फिर कहती थी कि एक-एक करके उसके ऊपर अपना बदन घिसो। मैं सारी सहेलियों में सबसे सुंदर हूँ तो उसने मुझे अपने नीचे लिटा लिया और बोली- सोनिया तुझे तो नंगा देख कर ही किसी का भी लंड झड़ जायेगा, अब तू चुपचाप पड़ी रह और उसने मेरी पुस्सी पर अपना मुँह लगा दिया और अपनी जीभ से चाटने लगी। सुनील बहुत मज़ा आया था। सबसे सुंदर होने के कारण रोज़ तीनों मिल कर मेरे ऊपर चढ़ती थीं और मुझे चूसती थीं। आज मैं जब से सो कर उठी हूँ मेरे पूरे बदन में फिर से वैसी ही बेचैनी हो रही है जो मुझे तब होती थी जब मेरी सहेलियाँ मेरे साथ अपना बदन घिसती थीं।”

मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है और सोनिया को बोला कि, “मैं आपको अपना लंड दिखाऊँगा तो मुझे क्या मिलेगा?”

सोनिया फट से बोल पड़ी, “जो तुम लेना चाहो।”

मैने कहा, “जो मैं बोलूँगा आपको मेरी बात माननी पड़ेगी और जैसे-जैसे मैं कहूँ वैसे ही आपको करना पड़ेगा। बोलो तैयार हो तो मैं अपना लंड दिखाऊँ।”

सोनिया तो एकदम उतावली हो रही थी। मैंने उसे अपने सामने खड़ा करा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और अपने दोनों हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसके मस्त चूत्तड़ों को दबाने लगा। सोनिया ने भी अपना मुँह खोल दिया था और मैं बड़े आराम से उसकी जीभ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने हाथ उसकी पैंटी पर से हटाये और उसकी नाइटी खोल दी और उसको सिर्फ पैंटी पहने रहने दिया। मैंने भी उसको छोड़ के अपने बदन पर अंडरवीयर के अलावा सारे कपड़े उतार दिये। सोनिया को शराब के नशे में होश भी नहीं था कि मैं उसको नंगा कर चुका हूँ। बाद में मैंने उसकी पैंटी उतार दी और उसकी दरार पर अपना हाथ फेरने लगा। जैसे ही मैंने उसकी दरार पर हाथ फेरा तो सोनिया का थोड़ा सा नशा टूटा और वोह बोली, “क्या सुनील तुमने मुझे तो नंगा कर दिया पर अभी तक अपना लंड नहीं दिखाया। यह बात गलत है!”

मैंने जल्दी से अपना अंडरवीयर उतारा और अपना मोटा तगड़ा तंदुरूस्त लंड उसके हाथों में दे दिया। सोनिया को तो मानो लकवा मार गया। वो बोली, “सुनील यह इतना सख्त बड़ा और मोटा कैसे हो गया!”

तब मैंने सोनिया को बड़े प्यार से अपनी जाँघों पर बिठाया और उसकी पुश्त चूचियों को अपने हाथों में भर कर बोला, “मेरी प्यारी दीदी! य़े तो आपको नंगा देख कर इतना बड़ा हो गया है! आपको पता है पुस्सी में को चूत कहते हैं और चूत में जब लंड जाता है तो उसे चुदाई कहते हैं! मर्दों को जब चूत नहीं मिलती और बहुत जोश में होते हैं तो वो अपने हाथ से अपने लंड को कसकर पकड़ लेते हुए आगे-पीछे करते हैं, जिसे मुठ मारना कहते हैं। इस तरह औरते भी जब मस्ती में होती हैं तो वोह अपनी जाँघें चौड़ी करके अपनी उँगली पर थूक लगा कर अपनी चूत के दाने को खूब मसल-मसल के अपनी आग ठंडी करती हैं। कईं औरतें अपनी चूत में गाजर, केला य बैंगन डाल कर अपनी प्यास बुझाती हैं!”

सोनिया हंसते हुए बोली, “सुनील मैं बच्ची नहीं हूँ तुमसे दो साल बड़ी हूँ और सैक्स, फकिंग और मैस्टरबेशन के बारे में जानती हूँ… बस ये हिंदी के वर्ड्स मेरे लिये नये हैं… मैं खुद भी कईं बार मैस्टरबेट करती हूँ… मेरा पूछने का मतलब ये था कि इतना बड़ा और मोटा लंड इतनी छोटी इतनी छोटी कंट… ऑय मीन चूत… ऑय मीन चूत में कैसे जायेगा। संजीदा तो कह रही थी कि लंड सिर्फ़ पाँच-छे इंच लम्बा होता है और करीब एक डेढ़ इंच मोटा होता है!”

मैंने कहा, “आप अभी यह मत सोचो, समय आने पर आप बड़े प्यार से अपने अंदर ले लोगी, और तरसोगी कि और मिल जाये। पर अभी आप वक्त मत खराब करो। अभी आप इसे लॉलीपॉप की तरह अपने मुँह में लेकर चूसो और जब तक मेरा जूस नहीं निकल जाता, आप इसे चूसती रहना और मेरा पूरा जूस पी जाना और मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दो। मैं भी आपकी कुँवारी चूत का पानी पीना चाहता हूँ।”

सोनिया को मुँह में लेने में थोड़ी सी तकलीफ हुई क्योंकि मेरा लंड मोटा था और अभी उसका मुँह छोटा था पर धीरे-धीरे सरकाने पर वो बड़े आराम से अपना मुँह ऊपर नीचे करते हुए चूसने लगी। मैंने भी सोनिया के दोनों चूत्तड़ अपने हाथों में ले लिये और उनको मसलते हुए उसकी ताज़ी जवान खुशबूदार चूत पर अपने होंठ चिपका दिये और सोनिया की तरह मैं भी उसकी चूत तबियत से चूसने लगा। करीब आधा घँटा एक दूसरे की चूसाई के बाद मेरा लंड अपनी धार उसके ताजे मुँह में देने को तैयार था और इधर सोनिया का भी मस्ती के मारे बुरा हाल था। वो अब आगे-पीछे होते हुए मेरे मुँह पर अपनी बूर जोर से घिस रही थी। मैंने उसका सिर अपने हाथ ले जा कर लंड पर दबा दिया और पिचकारी छोड़ दी। सोनिया ने भी लंड बाहर नहीं निकाला और मेरा पूरा जूस पी गयी। मैंने भी अपनी जीभ की स्पीड और बूर की चूसाई तेज़ कर दी और तभी सोनिया ने अपने मुँह से मेरा लंड निकाला और जोर से किलकारी मारते हुए मेरे मुँह में अपना जूस निकाल दिया। हम दोनों थोड़ी देर इस अवस्था में पढ़े रहे और फिर बाद में नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सोफे पर बैठ गये और स्मोक करने लगे।

मैंने बड़े प्यार से सोनिया का चेहरा उठा कर पूछा, “कैसा लगा अपने छोटे भाई का लंड और चूसाई? मज़ा आया कि नहीं?”

वोह शरमाते हुए बोली, “सुनील तुम बड़े बदमाश हो, पर सच में इतना आनंद तो मैंने आज तक महसूस ही नहीं किया। संजीदा और बाकी सहेलियाँ भी जब चूसती थीं और अपना बदन घिसती थीं तब भी इतना मज़ा नहीं आता था। सुनील मैं तो अब रोज़ चूसूँगी और अपनी तुमसे चुसवाऊँगी!”

मैंने भी अंजान बनते हुए कहा, “क्या सोनिया दीदी?”

तो वो बोली, “धत्त सुनील! तुम्हारा लंड और अपनी चूत!”

सोनिया मेरे आगोश में लेट कर बड़े ही प्यार से मेरे लंड से खेल रही थी जो अब फिर से खड़ा हो गया था। सोनिया बोली, “सुनील तुम मेरी चूत में नहीं डालोगे क्या…? मेरी बहुत इच्छा हो रही है कि लेकर तो देखूँ कैसा लगता है। साली कुत्तिया संजीदा अपनी चूत के पपौटे दिखा-दिखा कर बहुत चिढ़ाती थी औ कहती थी कि देखो चुदा कर मेरी चूत तुम सबसे सुंदर है। अब मैं भी उसे चिढ़ाऊँगी कि देख साली रन्डी… तू तो सिर्फ पाँच-छः इंच वाले से चूदाती है। मैं तो अपने कज़न सुनील का साढ़े-आठ इंच का लंड लेती हूँ अपनी चूत में।” फिर बोली, “सुनील तुमने किसी को चोदा है पहले?”

तब मैंने उसे सच-सच बताना ठीक समझा और बोला, “सोनिया दीदी! मैं मन ही मन में आपको और आपकी मम्मी से बहुत प्यार करता हूँ और रात को आप दोनो के ख्वाब देख कर मुठ मारा करता था…” और फिर मैंने उसे पूरी कहानी बता दी।

सोनिया बड़े आश्चर्य के साथ बोली, “क्या??? सुनील तुम मम्मी को चोदते हो? मैं नहीं मानती।”

तब मैंने कहा, “चलो ठीक है, कल जब आपकी मम्मी घर पर आयेंगी और मुझे जब अंदर बूलायेंगी तब आप बालकोनी से देखना… आपकी मम्मी कितने प्यार से मुझसे चुदवाती है। हमने तो प्लैन भी बनाया है कि आपकी मम्मी आपके साथ मेरी चुदाई करवायेंगी।”

सोनिया इतना सब सुन कर थोड़ी सी गरम हो गयी थी और अपनी चूत उसने मेरी टाँगों पर घिसनी चालू कर दी थी। मैंने कहा, “सोनिया दीदी! मैं आपको बड़े प्यार से चाची के प्लैन वाले दिन ही भोगना चाहता हूँ। इस लिये आज सिर्फ एक दूसरे की चूसाई करेंगे…” और इतना कह कर फिर से हम लोग ६९ के आसन में हो कर एक दूसरे को चूसने लगे। उस रात हम दोनों एक ही कमरे में एक दूसरे को बाहों में भर कर सोये। अगली सुबह मुझे मीना चाची को लेने जाना था तो मैं सोती हुई नंगी सोनिया को प्यारी से पप्पी दे कर मीना चाची को लाने के लिये एयरपोर्ट चला गया।

कार में बैठते ही मीना चाची ने मुझे किस करा और बोली, “सुनील मैं तो बूरी तरह से मचल रही हूँ चुदाई के लिये। सोनिया जब तक सो कर उठेगी तब तक तू मेरी जम कर चुदाई कर दे।”

मैंने कहा, “मीना डार्लिंग! मैं भी तो तड़प रहा हूँ तुम्हें चोदने के लिये और तुम अब सोनिया की चिंता छोड़ दो!” और मैंने मीना चाची को सारी कहानी बता दी।

मीना चाची ने आगे बढ़ कर मुझे किस कर लिया और बोली, “मैं तो सोनिया के साथ तेरी चुदाई कल करवाऊँगी। आज तो तू दिन भर सिर्फ मुझे चोद कस कर। मेरा तो पूरा बदन तरस रहा है तेरे हाथों से मसलवाने के लिये।”

हम जब घर पहुँचे तो सोनिया उठ गयी थी। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मीना चाची बोलीं, “सोनिया देख मैं सुनील के साथ सोने जा रही हूँ, तो कोई भी फोन या कोई घर पर आये तो उसे मना कर देना और मुझे डिस्टर्ब मत करना।”

सोनिया मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और समझ गयी कि उसकी मम्मी कमरे में जा कर मुझसे चुदवायेंगी। मीना चाची ने उसे देख लिया और बोली “सोनिया बेटा! मुझे सुनील ने सब बता दिया है। तू घबरा मत… कल मैं तुझे ज़िंदगी का वो सुख दिलवाऊँगी जिसकी तूने कल्पना भी नहीं करी होगी।”

इतना बोल कर मीना चाची ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मैंने उनको। फिर हम दोनों कमरे में घुस गये और घुसते ही एक दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे कितने दिनों के भूखे हों। मैं मीना चाची को अपनी बाहों में भर कर बुरी तरह से मसलते हुए चूस रहा था और मीना चाची मेरी पैंट खोल रही थी। मैंने देखा कि सोनिया बालकोनी में खड़ी हो कर हम दोनों को देख रही थी। इस ख्याल से कि सोनिया अपनी मम्मी को मुझ से चुदाते हुए देखेगी, मेरा लंड कुछ ज्यादा ही अकड़ गया और मैंने मीना चाची के कँधे दबा कर उन्हें वहीं बिस्तर पर बिठा दिया और सिर को पकड़ कर अपना लंड मीना चाची के मुँह में उतार दिया और सोनिया को देखते हुए मीना चाची का मुँह चोदने लगा और अपना पूरा लंड उनके मुँह में फँसा कर झड़ गया।

फिर मैंने मीना चाची कि साड़ी, ब्लाऊज़, पेटीकोट उतारे और सोनिया को दिखाते हुए उनकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से पहले खूब मसलीं और बाद में उनकी ब्रा उतार के उनके दोनों निप्पल अपनी उँगलियों के बीच में मसले। मीना चाची तो सितकार उठी और बोली, “मादरचोद इतना क्यों भड़का रहा है मेरी चूत की आग? पहले से ही चूत में आग भड़की हुई है।”

मैंने मीना चाची को खड़ी कर के उनके चूत्तड़ बालकोनी की तरफ कर दिये ताकि सोनिया आराम से देख सके। मीना चाची के हाई हील सैण्डलों में कसे पैर जमीन पर थे और मैंने उन्हें चूचियों के सहारे बिस्तर पर टिका दिया जिससे उनकी चूत और गाँड के छेद खुल कर सामने आ गये। मैंने सोनिया की तरफ़ देखते हुए मीना चाची की चूत और गाँड के छेद पर उँगली फेरनी चालू कर दी और एक हाथ से अपना लंड सहलाने लगा। उसके बाद मैने झुक कर मीना चाची के सैण्डलों में कसे पैर चाटने लगा और फिर धीरे-धीरे उनकी टाँगों और जाँघों को चाटते हुए ऊपर बढ़ा और फिर उनकी उभरी हुई चूत को अपनी जीभ से चटना शुरू कर दिया जिससे मीना चाची की सितकारियाँ निकलनी चलू हो गयी और वोह अपनी गाँड के धक्के मेरे मुँह पर देने लगी।

मीना चाची की चूत अपने मुँह में झड़वाने के बाद मैंने खड़े-खड़े ही अपना लंड सोनिया को दिखाते हुए मीना चाची की चूत पर रखा और झुक कर उनकी मदमस्त लटकती हुई चूचियों को पकड़ कर मसलते हुए जोर से धक्का मारा जिससे मेरा पूरा लंड मीना चाची की चूत में समा गया। मीना चाची इस पोज़ में अपने चूत्तड़ मटकाती हुई मेरा लंड ले रही थी और मैं भी पूरे जोश में उनकी चूत चोद रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर मीना चाची की टाँगें फैला कर बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर दना-दन चोदने लगा। करीब आधा घँटा चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़े और मीना चाची ने अपनी जाँघें बंद करके मेरा लंड अपनी चूत में ही रहने दिया और बोली, “डार्लिंग! ऐसे ही मेरे ऊपर सो जा ताकि जब तेरा दोबारा खड़ा हो तो बिना वक्त गंवाये मुझे चोदना चलू कर देना। मेरी चूत को इतनी ठंडक मिली है कि मैं तो एक सिगरेट पी कर सोऊँगी।”

मैं तो मस्ती में था और मीना चाची कि गुदाज़ चूचियों पर लेट कर सुस्ताने लगा। दिन भर हम दोनों ने जी भर के एक दूसरे के साथ चुदाई की और अपने बदन की हवस को पूरा शाँत की।

शाम को मीना चाची बिस्तर पर सिर्फ हाई हील वाले काले और चमचमाते सैण्डल पहने, नंगी पसरे हुए ड्रिंक पी रही थीं और मैं अपने होंठ और जीभ उनके सैण्डलों और पैरों पर फिरा रहा था। मुझे उनके सैण्डलों और पैरों की महक और टेस्ट बहुत अच्छा और उत्तेजक लग रहा था, जिसकी वजह से मेरा लौड़ा तन कर सीधा खड़ा था। मीना चाची बोली, “डार्लिंग अब और चूदाई नहीं करेंगे ताकि तेरा लंड कल सोनिया की चूत के लिये एकदम तैयार और बे-करार रहे। मैं चाहती हूँ कि जब उसे तेरा लंड मिले तो एक दम ताज़ा और मस्त मिले। कल दिन में सोनिया के साथ अपना हनीमून मना लेना।”

मैंने उनकी सैण्डल चाटते हुए कहा, “मीना चाची! दिदी मेरे लिये एकदम तैयार कर देना और हनीमून मैं उनके साथ मॉडर्न ड्रैस में मनाऊँगा।”

मीना चाची बोली, “तू चिंता मत कर! मैं उसे कल सुबह बाज़ार से सैक्सी काली ब्रा-पैंटी, मॉडर्न ड्रैस और सैक्सी हाई हील सैंडल दिला कर लाऊँगी जिसे देख कर तेरा लंड और तन जाये। मैं उसे बिलकुल मॉडर्न तरह से तैयार करूँगी और ध्यान रहे कल बारह-एक बजे तक तू घर पर मत रहना। मैं अपनी बेटी को बड़े प्यार से तैयार करना चाहती हूँ ताकि उसे अपनी पहली चूदाई हमेशा याद रहे!”

मैंने कहा, “पर अभी अपने इस तने हुए लंड का क्या करूँ?”

मीना चाची बोलीं, “तुझे मेरे सैंडल पहने हुए पैर बहुत सैक्सी लगते हैं ना! तो तू अभी अपना लंड इन्हीं पर घिस कर क्यों नहीं ठंडा कर लेता। सच, तुझे मेरे हाई हील सैंडल पहने पैरों को चोदने में जरूर मज़ा आयेगा।”

मीना चाची का यह आईडिया सुन कर मेरा लंड और भी अकड़ गया। मैंने झट से उनके सैंडल पहने पैरों को अपने दोनों हाथों में लिया और अपना लंड दोनों सैंडलों के बीच में आगे-पीछे करने लगा। सैंडल के तलुवों और लैदर का फील बहुत मस्त लग रहा था और चार-पाँच मिनट में ही मेरी पिचकारी मीना चाची के सैंडल, पैरों और टखनों पर छूट गयी। उसके बाद मीना चाची को नंगा बिस्तर पर छोड़ के बाहर आ गया और सीधा सोनिया के कमरे में गया। सोनिया सिगरेट पीते हुए पूरी नंगी हो कर अपनी चूत के दाने को घिस रही थी और मस्ती में अपने चूत्तड़ ऊपर नीचे उछाल रही थी। मुझे आया देख कर शरमा गयी और बोली, “सुनील ये क्या… तुम बिना नॉक करे ही आ गये।”

मैंने प्यार से उसका किस लिया और बोला, “मेरी प्यारी दीदी! बस आज-आज मुठ मार लो, कल के बाद तो आपकी जब भी इच्छा होगी, मैं आपको खूब चोदूँगा। बताओ आपको कैसा लगा अपनी मम्मी की चूदाई देख कर?”

सोनिया बोली, “सुनील! मम्मी बहुत ही सैक्सी दिखती है नंगी हो कर। मैंने तो मम्मी के साथ तुम्हें नंगा देख कर ही अपनी जाँघें कस ली थीं और जब तुम मम्मी के चूत्तड़ फैला कर उनकी चूत चाट रहे थे, मैंने अपना एक हाथ अपनी पैंटी में डाल कर अपने दाने को खुब घिसा था। सुनील बताओ ना! मम्मी मेरी तुम्हारे साथ चुदाई कब करवायेंगी।”

मैं बोला, “बस मेरी डार्लिंग दीदी! कल के लिये आप तैयार हो जाओ। कल आपको कच्ची कली से पूरा फूल बना दूँगा। फ़िलहाल अभी थोड़ा मेरे लंड को चूसते हुए अपनी मुठ मारो। देखो कितना मज़ा आयेगा।”

सोनिया ने लपक के मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया और अपनी चूत घिसते हुए सका-सक मेरा लौड़ा चूसने लगी और पँद्रह-बीस मिनट बाद तबियत से चूसते हुए अपनी चूत का और मेरे लंड का पानी निकाला। मैंने भी झुक के उसकी चूत का पानी अपनी जीभ से चाट-चाट कर पीया। मीना चाची नहा-धो कर सिर्फ़ पैंटी-ब्रा और सैण्डलों में ही अपने रूम से निकली और अपने मोटे-मोटे चूत्तड़ मेरी गोदी में रख कर बैठ गयी और हम तीनों ने एक साथ ड्रिंक की और स्मोक किया। मीना चाची उसके बाद उठीं और सोफ़े पर बैठ कर सोनिया को अपनी गोद में बिठाया और बोली, “मॉय डीयर! तू तैयार है ना औरत बनने के लिये?”

सोनिया ने शरमा कर अपना मुँह मीना चाची की ब्रा में कैद उन्नत चूचियों में छुपा लिया। मीना चाची ने उसका सिर उठा कर कहा, “सोनिया तू बड़ी किस्मत वाली है जो तुझे घर बैठे इतना तगड़ा मर्द और मस्त लंड मिलेगा। मैं नहीं चाहती कि तू भी मेरी तरह चुदाई के लिये तड़पे। तेरे पापा मुझे एक दम ठंडा नहीं कर पाते हैं, जिससे मेरा दिमाग खराब रहता था। पर अब मुझे सुनील का लंड मिल गया है जो मुझे पोर-पोर तक चुदाई का सुख देता है। मेरी इच्छा यही है सोनिया बेटी कि तू भी भरपूर चुदाई का मज़ा ले ले शादी से पहले। पता नहीं शादी के बाद ये सुख तुझे मिले ना मिले।”

उसके बाद हमने खाना खाया और अपने-अपने कमरे में चले गये। अगले दिन मैं सुबह नहा-धो कर बाहर चला गया ऐसे ही घूमने के लिये और करीब साढ़े बारह बजे वापस आया। मीना चाची ने मुझे पहले तो बाहों में लेकर किस करा और बोली, “तेरी रानी अंदर बैठी है सज-सँवर के। जा पहले तू नहा-धो ले और फ़्रैश हो जा। अब कल सुबह तक तुझे उसकी जम कर चुदाई करनी है। मैं सब कुछ रूम में ही पहूँचा दूँगी।”

मैं भी बेसब्री के साथ नहा-धो कर तैयार हुआ और सिर्फ़ अपनी सबसे सैक्सी दिखने वाली अंडरवियर पहनी और मीना चाची का चुम्बन लेकर कमरे में घुस गया। मज़ा आ गया था। अंदर मीना चाची ने पूरा डिस्को बनाया हुआ था और सोनिया को बहुत ही सैक्सी टॉप-स्कर्ट में तैयार करा हुआ था। सोनिया की टॉप के उपर के चार बटन खोल कर नीचे से गाँठ बन्धी हुई थी और गज़ब का मेक-अप करा हुआ था। सोनिया भी हाई हील्स पहन कर एक डाँस पर अपने चूत्तड़ थिरकाते हुए नाच रही थी। मैंने चुपचाप पीछे से जा कर उसकी मचलती हुई चूचियों को पकड़ लिया और सोनिया को हवा में घूमा दिया। फिर सीधा कर के हमने एक दूसरे को बाहों में कस लिया और तड़ातड़ एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे। मीना चाची ने सही कहा था। वाकय में सोनिया बहुत ही सैक्सी लग रही थी और अगर वोह ऐसे रूप में कहीं सड़क पर चली जाती तो जरूर उसकी चूत का आज भोंसड़ा बन जाता। लेखक सुनिल जैन हैं।

सोनिया ने झूक कर ड्रिंक बनाना चालू किया तो मैंने भी पीछे से उसकी स्कर्ट नीचे खिस्का दी और झुक कर कुत्ते कि तरह उसके चूत्तड़ों में अपना मुँह लगा दिया और चाटने लगा। मीना चाची ने सोनिया को काले रंग की नेट की बहुत ही टाईट रेशमी पैंटी पहनायी थी जिससे वो उसकी गाँड की दरार में घुस गयी थी और उसके गोरे फूले हुए छोटे-छोटे मस्त चूत्तड़ों को और मादक बना रही थी। क्या महक आ रही थी उसके पिछवाड़े से। मैं तो मस्ती के आलम में आ गया था।

सोनिया ने मुझे एक ड्रिंक दी और अपने लिये एक सिगरेट जलाई और मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर बोली, “सुनील… सुनील… आज जी भर के अपनी चचेरी बहन को चोद लो!” और मुझे बिस्तर पर बिठाकर मेरी अंडरवियर में तन्नाए हुए लंड पर अपने चूत्तड़ घिसते हुए बैठ कर ड्रिंक और स्मोक करने लगी। मैंने उसकी टॉप के बटन और बंधी हुई गाँठ को खोला और उसकी स्टॉप उतार दी। मीना चाची ने सोनिया को क्या मस्त काले रंग की रेशमी ब्रा पहनायी थी। एकदम पतले स्ट्रैप थे और ब्रा के कप सिर्फ़ उसके आधे निप्पल और नीचे की गोलाइयाँ छुपाये हुए थे। रेशमी नेट के अंदर से उसकी दूधिया चूचियों की बड़ी साफ झलक मिल रही थी। मैंने उसे खड़ा होने को कहा और कुर्सी पर टाँगें फैला कर बैठ गया और सोनिया को बोला कि वो अपनी टाँगें मेरी टाँगों के दोनों तरफ करके अपनी पैंटी में कसी हुई बूर मेरे लंड पर रखे और आराम से बैठ कर ड्रिंक करे। तब तक मैं उसकी कसी हुई मस्त जवानी जम कर चूसना और दबाना चाहता था।

सोनिया बड़े ही कायदे से मेरे लंड के उठान पर बैठ गयी और बहुत हल्के-हल्के ढँग से अपनी पैंटी मेरे लंड से उठी हुई मेरी अंडरवियर पर घिसते हुए मेरी गर्दन में बाहें डाल कर ड्रिंक और स्मोक करते हुए बोली, “सुनील डार्लिंग मसल डालो मेरी इन जवानियों को। देखो तो सही कैसे तन कर खड़ी है तुमसे चुसाने के लिये। मेरे मस्ताने सेबों का मज़ा ले लो मेरी जान।”

मैं भी अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हूक खोल दिये और बड़े प्यार से उसकी चूचियाँ नंगी करी। उसकी बत्तीस साइज़ की कसी हुई मस्तियाँ मेरे सामने तन कर खड़ी हुई थीं और मैंने भी बिना वक्त गँवाये दोनों चूचियों पर अपना मुँह मारना शूरू कर दिया। मैं बहुत ही बेसब्रा हो कर उसकी चूचियाँ मसल और चूस रहा था जिससे उसको थोड़ा सा दर्द हो रहा था। पर फिर भी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए कह रही थी, “डार्लिंग आराम से मज़ा लो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो। आज तो हमारा हनीमून है। कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ। जम के चूसवाऊँगी और मसलवाऊँगी। इनको इतना मसलो कि कॉलेज में मेरी चूचियाँ सबसे बड़ी हो जायें।”

करीब आधा घँटा इस चूसाई के बाद मैंने कहा, “सोनिया दीदी! अब तो आप तैयार हो जाओ औरत बनने के लिये।”

मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और फूलों से सजे पलंग पर लिटा दिया। लाल गुलाब से सजे पलंग पर काले रंग की पैंटी से ढका सोनिया का गोरा बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपसरा अपने कपड़े उतार के सो रही हो और काला भँवरा उसकी ताज़ी चूत का रस चूस रहा हो। मैं करीब पाँच मिनट तक सोनिया के नंगे बदन की शराब अपनी आँखों से पीता रहा, और फिर बिस्तर पर चढ़ कर मैंने सोनिया की कमर चूसनी चालू करी और चूसते हुए अपना मुँह उसकी पैंटी पर लाया और पैंटी का इलास्टिक अपने दाँतों में दबा कर अपने मुँह से उसकी पैंटी उतारने लगा। सोनिया ने भी अपने चूत्तड़ हवा में उठा दिये थे ताकि पैंटी उतारने में परेशानी ना हो। पर मीना चाची ने इतनी टाइट पैंटी पहनाई थी कि मुझे अपने हाथ भी लगाने हे पड़े उतारने में। दोस्तों! पैंटी उतार के जो नज़ारा मेरे सामने था, मैं आपको बता नहीं सकता।

मीना चाची ने बड़े ही प्यार से सोनिया की चूत के बाल साफ़ करे थे। सोनिया चूत चुदने के लिये इतनी बेकरार थी कि चूत के लिप्स गीले थे। सोनिया बोली, “डार्लिंग! मम्मी ने मेरी पूसी क्रीम से साफ करी है और मुझे बोला है कि मैं कभी भी अपनी पूसी शेव नहीं करूँ नहीं तो खराब हो जायेगी।”

मेरा लंड तो सोनिया की चिकनी नंगी मस्ताई हुई, चुदने के लिये तैयार चूत को देख कर ही मेरी अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने के लिये बेकरार था और उछल-कूद मचा रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना मुँह मेरे सामने लेटी हुई नशे की बोतल के खज़ाने के मुँह पर लगा दिया। सोनिया तो मस्त हो गयी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी चाहता था कि सोनिया थोड़ा पानी छोद दे ताकि उसकी ताज़ी कुँवारी चूत थोड़ी चिकनी हो जाये और तकलीफ कम हो। मैंने उसकी चूत का दाना चूसते हुए अपनी जीभ से उसकी चुदाई चालू कर दी और करीब पाँच मिनट बाद ही सोनिया ने मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और कस कर अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और जोश में काँपते हुए चूत्तड़ों के धक्के देती हुई मेरे मुँह में अपना रस देने लगी। मैंने भी मन से उसकी जवान चूत चूसी और चूत के लाल होंठों को अपने होंठों से चूसा।

फिर मैं घूटने के बल सोनिया के सामने बैठ गया और बूरी तरह अकड़ा हुआ अपना लंड उसके सामने कर दिया और सोनिया की गर्दन में हाथ डाल कर उसका मुँह अपने लंड के पास लाया और बोला, “मेरी प्यारी सोनिया दीदी, मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी चूत बजाने के लिये तो इनवाइट करो।”

सोनिया ने तपाक से अपना मुँह खोला और मेरा सुपाड़ा अपने होंठों के बीच ले लिया और जीभ फेरने लगी। मेरे लंड पर सोनिया के जीभ फेरने ने वो काम किया जो आग में घी करता है। मुझसे रहा नहीं गया और दोनों हाथों से सोनिया का सर पकड़ कर उसके मुँह में ही मैंने आठ-दस शॉट लगा दिये। लौड़े का तो मारे गुस्से के बूरा हाल था। एक तो उसे कल से चूत नहीं मिली थी और दूसरा उसके सामने ऐसी मलाईदार चूत थी और मैं चूतिया की तरह उसकी भूख मिटाने की बजाये चुम्मा चाटी कर रहा था।

अपना लंड सोनिया के मुँह से बाहर निकाल कर के मैं बिस्तर पर से उतरा और मीना चाची ने पहले से ही इम्पोर्टेड बड़ी ही खुशबू वाली चिकनाहट की क्रीम मेज पर रखी हुई थी। मैंने उसे उठा कर थोड़ी ज्यादा ले कर सोनिया की चूत पर और चूत के अंदर की दीवारों पर लगा दी और फिर अपने लंड पर लगाने लगा। सोनिया बोली, “ये तुम क्या कर रहे हो?”

मैंने उसे समझाया और बोला, “आज मैं आपकी चूत को भोंसड़ा बनाने जा रहा हूँ तो मुझे अपना लंड आपकी चूत में घूसेड़ना पड़ेगा और आपको तकलीफ ना हो इस लिये मैं आपकी चूत को और अपने लंड को चिकना कर रहा हूँ।”

मैंने बिस्तर पर चढ़ कर सोनिया की जाँघों को अपने हाथों से पूरा फैला दिया और एक हाथ से लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से सोनिया की चूत के लिप्स खोल कर अपना गुस्साया हुआ लाल सुपड़ा उसकी गुलाबी चूत से सटा दिया और बहुत हल्के-हल्के घिसते हुए बोला, “देख लो सोनिया दीदी! अपने लंड की आपकी चूत से मुलाकात करा रहा हूँ।”

सोनिया को भी अपनी चूत पर लंड घिसाई बहुत अच्छी लग रही थी। वोह सिर्फ़ मस्ती में “ऊँमम ऊँमम” कर सकी। एक दो मिनट बाद मैंने देखा कि सोनिया पर मस्ती पूरी तरह से सवार हो चूकी है तो मैंने अपने लंड का एक हल्का सा शॉट दिया जिससे मेरा लंड सोनिया की चूत बहुत ज्यादा कसी होने के कारण से फिसल कर बाहर आ गया। इससे पहले कि सोनिया कुछ समझ पाती, मैंने एक हाथ से अपना लंड सोनिया के चूत के लिप्स खोल के उसके छेद पर रखा और अपने चूत्तड़ों से कस के धक्का दिया जिससे मेरा मोटा तगड़ा लंड दो इंच सोनिया की चूत में घुस गया। सोनिया की गाँड में तो जैसे भूचाल आ गया। वोह जोर से चीखी, “सुनील मार डाला! ये क्या डाला है मेरे अंदर। बहुत दर्द हो रहा है। सुनील प्लीज़ बाहर निकाल ले।”

मैंने कुछ परवाह ना करते हुए दूसरा शॉट और कस के लगाया और अब मेरा पाँच इंच लंड सोनिया की चूत में समा चुका था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल के छोटे छेद में अपना लंड घुसा दिया हो और बोत्तल के मुँह ने कस कर मेरे लंड को पकड़ लिया हो। अगर मैंने सोनिया की कमर कस के पकड़ नहीं रखी होती तो सोनिया मेरा लंड निकाल के बाहर भाग जाती और ज़िंदगी भर कभी भी किसी से चुदवाती नहीं। सोनिया अब मेरे सीने पर मुक्के मारने लगी तो मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर फैला दिये और अपने पूरे शरीर का भार देते हुए उसके ऊपर लेट कर अपना पाँच इंच लंड अंदर-बाहर करने लगा। करीब पाँच-दस मिनट तक सिर्फ पाँच इंच से ही संतोष करने के बाद मैंने सोनिया से पूछा, “दीदी अब कैसा लग रहा है?”

तो बड़ी रुआँसी बोली, “जब तुमने घुसेड़ा था उस समय तो मेरी जान ही निकल गयी थी पर अब तुम्हारी लंड घिसाई से थोड़ी राहत मिली है और अच्छा भी लग रहा है।”

मैंने मौका अच्छा देख और अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और उसे पूरा दबोच कर एक ज़ोरदार कड़कड़ाता हुआ शॉट दिया जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लौड़ा सोनिया की चूत में समा गया। मेरे होंठ उसके होंठों पर रखे हुए थे इस कारण वो ज्यादा जोर से नहीं चीख पायी। मेरा पूरा लंड जो उसकी चूत में समा गया था उससे सोनिया को दर्द इतना हो रहा था कि अगले पाँच मिनट तक मैं तो शाँत अपना लंड उसकी चूत में डाल कर उसके रसीले होंठ चूसता रहा और सोनिया नीचे से दर्द के मारे लगातार अपने चूत्तड़ उछालती रही। जब पाँच मिनट बाद उसने अपने चूत्तड़ उछालना बँद किया तब मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी चूत में सरकाना चालू किया।

सोनिया अभी भी अपना बदन दर्द के मारे कसमसा रही थी पर पूरी मेरे नीचे दबी होने के कारण कुछ कर नहीं पा रही थी और पँद्रह-बीस धक्के अपनी चूत में ले लेने के बाद उसका दर्द भी कम हो गया था और उसका कसमसाना भी। मैंने सोनिया के होंठों के ऊपर से अपने होंठ हटा लिये और बोला, “क्यों मेरी प्यारी दीदी! अब बताओ कैसा महसूस हुआ जब मैंने अपना मस्त लौड़ा आपकी चूत में डाल कर कली से फूल बना दिया और अब कैसा लग रहा है दर्द खतम होने पर।”

सोनिया बोली, “क्या डार्लिंग तुमने तो मेरी जान ही निकल दी। जब तुमने अपना लंड मेरी चूत में पेला था उस समय तो मुझे ऐसा लगा था कि शायद आज तुम मुझे मेरी चूत से लेकर दो हिस्सों में फ़ाड़ के रख दोगे। बहुत दर्द हुआ था सुनील पर तुमने इतने प्यार से मुझे सम्भाला और बाद में जो प्यार से मेरी चूत बजा रहे हो तो ऐसा लग रहा है कि मैं ज़न्नत में हूँ। मेरे बदन से ऐसी मस्ती छूट रही है कि क्या बताऊँ। सुनील अब बहुत मज़ा आ रहा है। अब तुम जी भर के मुझे चोदो।”

मैंने सोनिया की दोनों जाँघें चौड़ी कर दीं और अपने हाथों से उसकी दोनों सैंडल की हील पकड़ लीं और खुद घूटने के बल बैठ कर अपनी गाँड के दनादन धक्के मारने लगा। सोनिया को अब भी तकलीफ हो रही थी पर वो भी अब चुदाई में पूरा साथ दे रही थी। पहली चुदाई के कारण वो और ज्यादा मस्ती सहन नहीं कर पायी और सितकारी भरती हुए अपनी चूत का पानी मेरे लंड पर गिराने लगी और बड़बड़ा रही थी, “आह आँह सुनील मज़ा आ गया। मुझे क्या मालूम था इतनी तकलीफ के बाद इतना सुख मिलेगा। इस सुख के लिये तो मैं अपनी चूत बार-बार तुमसे फड़वाऊँगी।”

मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और बलबला कर उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया। मैं सोनिया की कोरी चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, “बहन की लौड़ी दीदी! जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!” और आराम से सिगरेट सुलगाकर अपनी पीठ टिका कर पीने लगा।

सोनिया ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया, पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर सोनिया के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसाता रहा। दस मिनट बाद मैंने सोनिया को बोला, “चलो आज आपको घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ। मेरी प्यारी दीदी! करोगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?” सोनिया ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “सुनील कैसे घोड़े की सवारी?  तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में चोदूँ?”

मैंने कहा, “हाँ दीदी! आपको तो सब पता है… पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए।”

सोनिया मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले। जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया। सोनिया बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी।

दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, “सोनिया दीदी! अब आप अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे करो और लंड सवारी का मज़ा लो।”

इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा। सोनिया की हिम्मत मुझे माननी पड़ी कि दर्द होने के बावजूद भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार करीब आधे घंटे तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का फाऊँटेन उसकी चूत में गिरा दिया और सोनिया को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे।

करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा सोनिया सिगरेट पीते हुए मेरे लंड से खेल और चूस रही थी। जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी। मैंने भी कहा, “दीदी! चूसो इसे… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”

इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने सोनिया से कहा, “सोनिया दीदी! आपको ये तो मानना पड़ेगा कि आज भी और आगे भी मैं जब आपको चोद कर ये सुख दूँगा, ये सब आपकी मम्मी की वजह से ही मुमकीन हुआ है।”

सोनिया तपाक से बोली, “यू आर राइट सुनील! ऑल थैंक्स टू मम्मी! अगर मम्मी नहीं मानतीं तो पता नहीं मेरी चूत कब चुदती।”

मैंने कहा, “फिर तो दीदी ये गलत बात है कि हम दोनों अंदर इतना मज़ा ले रहे हैं और आपकी मम्मी बाहर अपनी चूत अपनी उँगली से ठंडी कर रही है। मेरी बड़ी इच्छा है कि आप दोनों को मैं एक ही पलंग पर एक साथ नंगा करके चोदूँ।”

सोनिया फ़ोरन ही तैयार हो गयी और बोली, “मैं अभी जा कर मम्मी को बुला कर लाती हूँ।”

मैंने कहा, “नहीं! आप बैठ कर एक ड्रिंक और सिगरेट पियो। मैं आपकी मम्मी को लाता हूँ।”

मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि मीना चाची अपना ब्लाऊज़ उतार कर ब्रा और पेटीकोट में लेटी हुई थी और अपना पेटीकोट कमर तक उठा कर स्मोक करते हुए अपने वाइब्रेटर से मुठ मार रही थीं। मुझे देख कर बोली, “क्या बात है सुनील! सोनिया ठीक तो है ना?” मीना चाची की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं।

मैंने कहा, “डार्लिंग घबराओ नहीं! मेरा लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की। अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है। चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है। इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी। तुम्हारी तरह वाइब्रेटर से ठंडी नहीं होगी।”

मीना चाची बोली, “क्या बात है (हुच्च) तू बाहर कैसे आ गया?”

मैंने कहा, “मीना मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ और तुम्हारी चूत बजाऊँ।”

मीना चाची बोली, “व्हॉट? ऑर यू क्रेज़ी? (हुच्च) मुझे अपनी बेटी (हुच्च) के सामने चुदाने में शरम आती है।”

सोनिया जो शायद दरवाजे पर खड़ी हो कर हमारी बातें सुन रही थी, सिर्फ़ सैंडल पहने नंगी ही एक दम बाहर आ गयी और बोली, “मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना। मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है।”

मीना चाची उठ कर खड़ी हुईं तो गिरते-गिरते बचीं। उन्होंने काफ़ी ड्रिंक कर रखी थी और नशे और हाई पेन्सिल हील की सैण्डलों की वजह से उनका बैलेंस बिगड़ गया पर सोनिया ने उनको अपनी बाहों में भर लिया। मैने भी पीछे से जा कर मीना चाची की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबा लिया और मीना चाची को बीच में दबाये हुए बेडरूम में ले कर आ गये क्योंकि वो नशे में अपने आप चलने की सूरत में नहीं थीं।

मैंने सोनिया को कहा, “चलो दीदी! अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ।”

मैंने मीना चाची की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं। सोनिया ने भी मीना चाची के सारे कपड़े उतार दिये और बोली, “लो सुनील अबकी बार मेरी मम्मी की चूत की सिकाई करो।” लेखक सुनिल जैन हैं।

क्या नज़ारा था दोस्तों! अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ हाई हील सैण्डलों में, मेरे सामने थीं। मैंने भी नंगी मीना चाची को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, “मीना डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा और जैसे तुमने उस दिन कहा था कि कोरी चूत तो नहीं दे सकी पर अपनी कोरी गाँड मरवाऊँगी, तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड का उद्घाटन करूँगा। अपनी गाँड मरवाओगी ना मीना डार्लिंग।”

मीना चाची नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, “मेरे गाँडू राजा! मैं तुझे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ। साले (हुच्च) तू… तूने… मेरी चूत मारी… मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और…. और… यहाँ तक की साले चूतिये तूने मेरे सैण्डलों और पैरों को भी नहीं छोड़ा…. बोल साले भोसड़ी के… (हुच्च) तुझे कभी मैंने ना कहा क्या… हैं? तो इसके बाद क्या पूछता है… जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, अब गाँड मारनी है… तो साले गाँड मार ले, पर मेरी गाँड जरा प्यार से मारना, मैंने आज तक (हुच्च) तेरे चाचा को उँगली तक नहीं लगाने दी।”

मैंने कहा, “डार्लिंग तुम बस आराम से एक और ड्रिंक लगा कर कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ… मैं अपना लंड सोनिया से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ।”

मीना चाची ने ड्रिंक बनाने की बजाये व्हिस्की की बोत्तल ही मुँह से लगा कर पीने लगी। मुझे पहले तो चिंता हुई कि कहीं इतना पीने से बिल्कुल ही पस्त हो कर सो ना हो जायें और मेरा सब प्लैन चोपट हो जाये पर फिर ख्याल आया कि चाची पीने की आदी हैं। वैसे तो आम-तौर से वो लिमिट में ही पीती हैं पर पहले भी मैंने उन्हें ज्यादा पी कर नशे में धुत्त देखा है और जब भी मीना चाची नशे में कंट्रोल के बहार हुई हैं तब वो पस्त या शाँत होने की बजाय हमेशा काफ़ी बेकाबू और ज्यादा उत्तेजित ही हुई हैं। यही सोच कर मैंने सोनिया को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, “लो सोनिया दीदी! चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये। देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी। मीना! देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये। ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी। देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है।”

मैं सोनिया का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा। इतनी देर में मीना चाची भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी। मैने सोनिया के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, “दीदी चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये… अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आपकी मम्मी को ज्यादा तकलीफ न हो।”

सोनिया ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और मीना चाची की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, “सुनील! मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है। मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है।”

मैंने कहा, “आराम से खूब क्रीम मलो। थोड़ी देर बाद जब गाँड का छेद रीलैक्स हो जायेगा तब बड़े आराम से मेरा लंड अंदर जायेगा…” और मैं स्मोक करने लग गया। दोस्तों क्या सीन था कि एक बेटी अपनी माँ की गाँड पर पूरी लगन से क्रीम मल रही थी और अपनी माँ को गाँड मरवाने के लिये तैयार कर रही थी। सिगरेट खतम होने के बाद मैं पलंग पर चढ़ा और अपना तन्नाया हुआ लंड मीना चाची के चूत्तड़ों पर फेरने लगा और सोनिया को बोला, “अब ज़रा मेरे लंड के ऊपर भी क्रीम लगाओ! अब मैं आपकी मम्मी के भूरे रंग के गाँड के छेद को खोलूँगा।”

सोनिया ने बड़े ही प्यार से मेरे लंड पर क्रीम लगायी और एकदम चिकना कर दिया। मैंने सोनिया को कहा कि वो अपने दोनों हाथों से अपनी मम्मी के चूत्तड़ पकड़ ले और खींच कर चौड़े करे ताकि मीना चाची की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल जाये। सोनिया ने मेरे कहे अनुसार अपनी मम्मी के दोनों विशाल चूत्तड़ों को पकड़ लिया और चौड़े कर दिये जिससे मीना चाची की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल गया। मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और गाँड के भूरे छेद पर टिका दिया और दूसरे हाथ की उँगलियों से गाँड के छेद को और चौड़ा किया और लंड का सुपाड़ा टिका कर हल्के से झटका दे कर मीना चाची की कोरी गाँड में सरका दिया। क्रीम की चिकनाहट के कारण मेरा एक इंच लंड मीना चाची की गाँड के छल्ले में जा कर फँस गया।

मीना चाची बोलीं, “सुनील बहुत दर्द कर रहा है बाहर निकाल ले।”

मैंने कहा, “मीना घबराओ नहीं। आराम-आराम से दूँगा। बस तुम हिम्मत कर के लंड लेती रहो।”

इतना बोल कर मैंने सोनिया को इशारा किया कि वो अपनी माँ की गाँड एक दम कस कर पकड़ ले। सोनिया ने भी मेरा कहना माना और मैंने अपने दोनों हाथों से मीना चाची की कमर पकड़ ली और ज़ोरदार झटका मारा जिससे चिकनाहट होने के कारण मेरा लंड सरकते हुए पूरा सात इंच मीना चाची की गाँड में समा गया। मीना चाची को तो जैसे बिजली का शॉक लग गया हो। अगर सोनिया ने उनके चूत्तड़ और मैंने उनकी कमर कस कर नहीं पकड़ी होती तो शायद मीना चाची मेरा लंड निकाल देतीं पर बेचारी मजबूर थी… सिवाये कसमसाने के और गालियाँ देने के अलावा वो कुछ भी नहीं कर सकती थीं।

मैंने भी बिना कुछ परवाह किये बिना अपना पूर लंड मीना चाची की गाँड में उतार कर ही दम लिया और हल्के-हल्के शॉट देने लगा। मीना चाची तो दर्द के मारे पागल हो गयी थी और बोले जा रही थीं, “अरे मादरचोद, भोसड़ी वाले मार डाला रे। तेरी माँ का भोंसड़ा मादरचोद! अगर मुझे मालूम होता कि गाँड मरवाने में इतना दर्द होता है तो बहन के लंड तुझे छूने भी ना देती। बहनचोद मैं ज़िंदगी भर तुझे जैसे कहेगा वैसे ही चुदवाऊँगी और चूसूँगी। तू जिसको बोलेगा मैं उसको चुदवा दूँगी तेरे से। मुझे छोड़ दे माँ के लौड़े। हाय मेरी माँ! फट गयी मेरी गाँड। मादरचोद सत्यानाश कर दिया तूने आज मेरी गाँड का। आज तक मैंने बड़े प्यार से बचा कर रखी थी।”

मीना चाची बोलती रहीं पर अब मैं ताव में आ चुका था और हुमच-हुमच कर अपना लंड गाँड में पेल रहा था। मीना चाची को भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि अब वो कह रही थीं, “मार ले मेरे डार्लिंग! मार ले अपनी चाची की गाँड। हाय हाय! शूरू-शूरू में तो बहुत दर्द हुआ डार्लिंग पर वाकय में अब बहुत मज़ा आ रहा है। सोनिया तू भी सुनील से अपनी गाँड जरूर मरवाना।”

करीब बीस पच्चीस मिनट तक मीना चाची की गाँड मारने के बाद मैंने अपना रस मीना चाची की गाँड में ही निकाल दिया।

दोस्तों! उस दिन के बाद महीने भर जब तक चाचा नहीं आये, मैंने उन दोनों माँ-बेटी को एक ही बिस्तर पर एक साथ नंगा करके खूब चोदा। चाचा के आने के बाद, मीना चाची को दिन में जब भी समय मिलता, एक बार तो चुदवा ही लेती थी। और मैं हर रोज़ सोनिया के साथ सोता था और हम दोनों जम कर चुदाई करते थे। मीना चाची ने और सोनिया ने अपनी सहेलियों का भी खूब मज़ा दिलवाया। मीना चाची और सोनिया के कारण मुझे अलग-अलग औरतों को चोदने का मौका मिला। आशा करता हूँ कि आप सब को मेरी आप-बीती सुन कर मज़ा आया होगा।


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